RAJIV GANDHI MISSION FOR WATERSHED MANAGEMENT

Department of Panchayat and Rural Development

Government of Madhya Pradesh

 

 

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मिली जल ग्रहण क्षेत्र दुंदाहेडी

 

ग्राम मल्हारपुरा विकास खण्ड खिलचीपुर

 

मल्हारपुरा स्टाप डेम ने बदली ग्रामीणों की तकदीर

            ग्राम मल्हारपुरा मिली जल ग्रहण क्षेत्र दुधाहेड़ी अंतर्गत ग्राम मल्हारपुरा विकास खण्ड खिलचीपुर  में कुल परिवार दांगी समाज के निवास करते है जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि एवं पषुपालन है । मल्हारपुरा जलग्रहण क्षेत्र में योजना प्रारम्भ से पूर्व प्रति परिवार औसत ३० से ४० बीघा जमीन है। जिसमें से केवल ३० :  भूमि १० से १२ बीघा जमीन सिंचित थी शेष जमीन आसिंचित रहकर केवल खरीफ सीजन की फसल का उत्पादन ही होता था कुल उपलब्ध भूमि १५० हेक्टर में से केवल ४५ हेक्टर में खेती की जाती थी। सिंचित क्षेत्र का एक मात्र स्त्रोत कूप एवं नाला था। क्षेत्र में गाडगंगा नदी होने के बावजूद भी पानी का उपयोग रवी की फसल हेतु नहीं हो पाता था। नदी का समस्त पानी माह सितंबर तक बहकर नदी से निकल जाता था।

             इस समस्या के निराकरण हेतु ग्राम मल्हारपुरा में जलग्रहण समीति की बैठक बुलाकर समस्त ग्राम वासियो ने स्टाप डेम निर्माण हेतु प्रस्ताव रखा गया, ग्राम वासियों एवं जलग्रहण समिती के सदस्यों की सहमती के आधार पर १२० मीटर लम्बाई का स्टाप डेम बनाने हेतु प्रस्तावित किया गया। प्राक्कलन तैयार कर प्रस्ताव की लागत राषि रू. ७.७५ लाख आंकी गई जबकि मल्हारपुर जलग्रहण समीति के खाते में २.४ लाख राषि उपलब्ध थी। क्षेत्र सूखे की चपेट में था अतः श्री मान जिलाधीष महोदय से ५ लाख रूपये की सूखा राहत की मांग की गई। जिलाधीष महोदय की स्वीकृति उपरांत सूखा राहत से राषि रू. ५लाख प्राप्त होने के पष्चात निर्माण कार्य किया गया।

 

राजीव गॉंधी जल ग्रहण क्षैत्र प्रबन्धन मिषन

 

जिला पंचायत, राजगढ (ब्यावरा) म.प्र.

 

मिलीवाटर षेड, सुआहेडी विकास खण्ड, राजगढ

 

विधानसभा क्षैत्र - राजगढ (डी.पी.ए.प.ी ९वां बैच हरियाली-१)

 

परिचय :- मिलीवाटर षेड सुआहेडी अन्तर्गत माइक्रोवाटर षेड जोडक्या के ग्राम जोडक्या के किनारे से बहने वाले में बहाव श्रखंला बद्ध संरचनाओं के निर्माण के पूर्व माह नवम्बर तक ही रहा करता था क्यों कि नाले के बीच कुछ स्थानों पर प्राकृतिक पूल स्थित है उनमें पंप चलाकर रबी सीजन का प्रथम पानी खेतो में दिया जाता था अतः नाले का बहाव प्रथम पानी देने में ही समाप्त हो जता था।

           जल ग्रहण योजना में ग्राम वासियो की अनुषंसा पर ही श्रंखला बद्ध संरचनाओं को पंचवर्षीय योजना में सम्मिलित किया गया तदानुसार द्वितीय वर्ष में चेक डेम उस से नीचे बोरी बंधान एवं और नीचे जाकर पक्का स्टाप डेम का निर्माण किया गया।

 

सिंचाई पानी की उपलब्धता में वृद्धि :-- वर्षा उपरांत अक्टोम्बर माह में ही षीघ्र स्टाप डेम के फाटक लगादिये गये स्टाप डेम के ऊपरी क्षैत्र में नाले पर बोरी बन्धान का निर्माण किया गया उसके भी ऊपरी क्षैत्र में नाले पर चेक डेम से बहाव पानी पूर्व से लगभग २०० मीटर तक नाले में रोका गया एवं चेक डेम के ऊपर से निरतंर बहाव जारी था। इस तरह तीनों संरचनाओं से नाले के बहाव को पूर्णतः रोक लिया गया एवं इन श्रखला बद्ध संरचनाओ से लगभग १.५० कि.मी. क्षैत्र में नाले के किनारो तक ओसतन ०.८० मी. ऊचॉई में पानी भर गया।

    संरचनाओं के निर्माण से किसनों द्वारा अपनी सुविधानुसार कहीं भी अर्थात अनेको स्थानो पर पंप स्थापित कर लिये गये। इस तरह पूर्व जहॉ कुछ स्थानो पर ही पंप स्थापित कर एक पानी सिंचाई की जाती थी वही अब सुविधानुसार अपने खेत के पास ही पंप स्थापित छः पानी तक फसलो को दिये गये। नालो का बहाव जहॉ एक माह रहता था वही पश्चात्‌ पॉंच माह तक नाले में बहाव बना रहा।

 फसलो के चयन में बदलाव :- पर्याप्त पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसानों द्वारा फसलों के चयन में परिवर्तन किया गया। जहॉं पूर्व में कम पानी फसलें यथा - चना, मसूर, धना आदि बोते थे वही अब सभी ने अधिकाषंतः गेहूॅ की फसल ही बोयी।

 कृषि उत्पादन में वृद्धि :- फसलों को पर्याप्त पानी मिलने से एवं सिचिंत क्षैत्र के रकबे में वृद्धि होने से कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। जहॉ पूर्व में २२ हे. जमीन में सिचाई की जाती थी। वही पानी रोकने के पश्चात ३३.५० हे. में सिचाई की जाने लगी अर्थात ११.५० हे. अतिरिक्त रुप से बहने से एवं पूर्व से सिंचित क्षैत्र की फसलों को पूरा पानी मिलने से कृषि उत्पादन लगभग ८० क्विटंल की वृद्धि हुई।

भूजल स्तर में वृद्धि :- स्टाप डेम श्रखला क्षैत्र में नाले के दोनो ओर के कुओं के भूजल स्तर में पर्याप्त वृद्धि हुई। तालिका से पता चलता है कि पोस्ट मानसुन भूजल स्तर में ०.६६ मी. की वृद्धि हुई एवं पोस्ट रबी पीरियड में २.२३ की वृद्धि परिलक्षित हुई।

 

राजीव गांधी जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन

 

 

वाटर शेड कमेटी बोचरो-।, वि.ख. ब्योहारी, जिला-शहडोल, म.प्र.

 

 

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विकासखण्ड ब्योहारी अन्तर्गत डी.पी.ए.पी. आठवॉ बैच हेतु १००० हे. क्षेत्रफल का चयन किया जाकर वाटरशेड कमेटी बोचरो-। एवं बोचरो-॥ का गठन किया गया, उक्त परियोजना संचालन का दायित्व परियोजना क्रियान्यवन दल सुगम जनहित संस्थान को सौंपा गया। विकास कार्यों के क्रम बद्ध क्रियान्वयन के रूप में वाटरशेड कमेटी बोचरो-। की एक संरचना टटियाझर नाला बंधान-। के लाभ का चित्रण यहॉ प्रस्तुत किया जा रहा है :-

ग्राम पंचायत बोचरो अन्तर्गत टटियाझर टोला आदिवासी बाहुल्य है, जहॉ पूर्व में पेय जल स्त्रोत टटियाझर नाला में एक कुण्ड बनाकर लिया जाता था। आज वाटरशेड मिशन के कार्य सम्पादन वर्ष २००२-०३ से टटियाझर बंधान बनाने में जहॉ १२ आदिवासी परिवार अपने खुशहाल जीवन का सपना साकार कर चना, गेंहूॅ, अरहर की पूरी फसल ७ हेक्टर भूमि पर पैदावार कर रहे हैं, और अपने बीच में जगह-जगह छोटे कुण्ड बनाकर पानी पीने के लिए उपलब्ध देखकर कूप खनन कार्य कर के स्वच्छ पानी पी रहे हैं। टटियाझर के जिन लोगों के बीच ऐसी सोच पूर्व में नहीं थी लेकिन वाटरशेड योजना आई एवं ग्रामीण जीवन में खुशहाली लाई'' की भावना से जहॉ हर जगह बंधान बनाकर पानी देखा जाने लगा तथा कूप में जल का स्तर बढा है